उन्नाव/लखनऊ।
कालीघाट शक्तिपीठ सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंभुनाथ बरनवाल ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव से सांसद एवं वरिष्ठ संत सच्चिदानंद हरी साक्षी महाराज से शिष्टाचार मुलाकात की। यह मुलाकात धार्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इस अवसर पर शंभुनाथ बरनवाल ने साक्षी महाराज को मां काली की एक भव्य और दिव्य प्रतिमा भेंट की तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक औपचारिक भेंट नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और सांकेतिक संदेश छिपा हुआ है।

योगी आदित्यनाथ का शासन रामराज्य का प्रतीक – शंभुनाथ बरनवाल
मुलाकात के दौरान शंभुनाथ बरनवाल ने उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार की सराहना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शासन रामराज्य की अवधारणा को साकार करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था, सनातन संस्कृति और राष्ट्रवादी चेतना को मजबूत करने का कार्य योगी सरकार के नेतृत्व में निरंतर हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार योगी आदित्यनाथ हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मजबूत स्तंभ हैं, उसी प्रकार साक्षी महाराज भी हिंदुत्व विचारधारा के एक प्रमुख और प्रभावशाली चेहरे रहे हैं।
राम मंदिर आंदोलन से राष्ट्र जागरण तक साक्षी महाराज की भूमिका
शंभुनाथ बरनवाल ने साक्षी महाराज के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने राम मंदिर आंदोलन, राष्ट्र जागरण और सनातन परंपराओं के संरक्षण से जुड़े हर बड़े आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई है। उनका मार्गदर्शन आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
बंगाल में पुनर्जागरण की आवश्यकता, मां काली की प्रतिमा का विशेष संदेश
शंभुनाथ बरनवाल ने बताया कि मां काली की प्रतिमा भेंट करने के पीछे एक विशेष उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में धार्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की आवश्यकता है, और ऐसे समय में साक्षी महाराज का आशीर्वाद और मार्गदर्शन अत्यंत सहयोगी सिद्ध हो सकता है।
सनातन परंपरा और राष्ट्र चेतना के लिए संतों का मार्गदर्शन जरूरी
कालीघाट शक्तिपीठ सेवा समिति का मानना है कि सनातन परंपरा, राष्ट्र चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए संतों, समाजसेवियों और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े लोगों का मार्गदर्शन बेहद आवश्यक है। समिति भविष्य में भी ऐसे संवाद और सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
धार्मिक, सांस्कृतिक और वैचारिक दृष्टि से अहम मुलाकात
यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और वैचारिक समन्वय का प्रतीक मानी जा रही है। समिति का विश्वास है कि ऐसे प्रयासों से राष्ट्र निर्माण और सनातन संस्कृति को नई ऊर्जा मिलेगी।